प्राचीन भारतीय इतिहास: एक सम्पूर्ण व विस्तृत परिचय
Study Material by: History Study Adda
टीजीटी, पीजीटी, एलटी, जीआईसी, नेट जेआरएफ, यूपीएससी, पेट और एसएससी इत्यादि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले सभी छात्रों के लिए प्राचीन भारतीय इतिहास का यह बेसिक कांसेप्ट (Basic Concept) समझना अत्यंत आवश्यक है। इतिहास केवल रटने का विषय नहीं है, बल्कि यह अतीत और वर्तमान को जोड़ने और समझने की एक निरंतर धारा है। इस विस्तृत आर्टिकल में हम इतिहास के मूलभूत सिद्धांतों, उत्पत्ति, विचारकों के कथनों, भौगोलिक विभाजन, इतिहास के वर्गीकरण (साक्ष्य के आधार पर) और महत्वपूर्ण संवतों (कैलेंडर) का गहनता से अध्ययन करेंगे।
1. इतिहास का अर्थ और उत्पत्ति (Meaning & Origin of History)
'इतिहास' शब्द की व्युत्पत्ति (भारतीय दृष्टिकोण)
- ✦'इतिहास' शब्द संस्कृत भाषा (हिंदी की जननी) के तीन शब्दों से मिलकर बना है: इति + ह + आस
- ✦इसका शाब्दिक अर्थ है: "ऐसा निश्चित रूप से हुआ है"।
- ✦इसका तात्पर्य है कि हम इतिहास में कोई भी कपोल-कल्पनाएं (Fiction) नहीं पढ़ते। जो कुछ भी साक्ष्य आपके सामने प्रस्तुत किए जा रहे हैं, वे भूतकाल में कभी न कभी घटित हो चुके हैं और यह बिल्कुल सत्य आधारित घटना है।
'History' शब्द की उत्पत्ति (पश्चिमी दृष्टिकोण)
- ✦'History' मूल रूप से अंग्रेजी भाषा का शब्द है।
- ✦इस शब्द की उत्पत्ति यूनानी (ग्रीक) भाषा के शब्द 'हिस्टोरिया' (Historia) से हुई है।
- ✦'हिस्टोरिया' का अर्थ होता है— अन्वेषण करना, अनुसंधान करना, या खोजबीन करना (Inquiry/Investigation)।
2. इतिहास का महत्व और प्रमुख विचारकों के कथन
भारतीय ग्रंथों में इतिहास का महत्व
- ✦अथर्ववेद में: इतिहास को 'उपवेद' और 'पंचम वेद' (पांचवां वेद) कहा गया है। यह परंपरा और निश्चितता का प्रतीक है।
- ✦महाभारत में: इसके अनुसार, इतिहास केवल घटनाओं का ब्यौरा नहीं है, बल्कि यह ऐसी रुचिकर कथा है जो मनुष्य को जीवन के चार पुरुषार्थों— धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष— की प्राप्ति में मार्गदर्शक का कार्य करती है।
विद्वानों और इतिहासकारों की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
- ✦हेरोडोटस (इतिहास के जनक): पाँचवीं सदी ईसा पूर्व के यूनानी लेखक हेरोडोटस की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम 'हिस्टोरिका' है, जिसमें उन्होंने भारत और फारस के बीच के व्यापारिक संबंधों का वर्णन किया है। हेरोडोटस ने यह भी कहा था कि "भारत सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है।" रोम के एक दार्शनिक सिसरो ने सर्वप्रथम उन्हें 'इतिहास का पिता' (Father of History) कहा था।
- ✦प्रोफेसर ब्यूरी: "इतिहास विज्ञान है, ना कम ना ज्यादा।" उनका तर्क है कि इतिहास तथ्यात्मकता और ठोस प्रमाणों पर आधारित है, इसमें निष्पक्षता होती है। जिस प्रकार विज्ञान में गहन जांच (Experiment) होती है, वैसे ही इतिहास में साक्ष्यों का विश्लेषण होता है।
- ✦ई. एच. कार (E.H. Carr): "इतिहास अतीत और वर्तमान के मध्य चलने वाला अनवरत (लगातार) संवाद है।" उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास वर्तमान का चश्मा है; यानी हम अतीत को हमेशा अपनी वर्तमान परिस्थितियों की सोच के आधार पर देखते हैं।
- ✦अबुल फजल: इन्होंने इतिहास को एक 'चिकित्सालय' (Hospital) और एक 'मरहम' के रूप में देखा है। उनके अनुसार, "इतिहास एक चिकित्सालय है जहाँ लोग अपने दुख और उदासी का इलाज करते हैं।" इतिहास हमें धैर्य रखने की क्षमता देता है और दिखाता है कि बुरा समय भी बीत जाता है।
- ✦फ्रांसिस बेकन: "इतिहास व्यक्ति को बुद्धिमान बनाता है।" अतीत की गलतियों और सफलताओं का विश्लेषण हमें वर्तमान में बेहतर निर्णय लेने (अनुभव) में मदद करता है।
- ✦शीले (Seeley): "इतिहास विगत (पहले) की राजनीति है।" यानी आज का इतिहास कल के राजनीतिक फैसलों का परिणाम है।
- ✦डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: "इतिहास राष्ट्र की स्मरण शक्ति (Memory) है।" जैसे याददाश्त के बिना व्यक्ति अपनी पहचान खो देता है, वैसे इतिहास के बिना राष्ट्र अपना अस्तित्व खो देता है।
- ✦कार्ल पापर: "इतिहास का कोई लक्ष्य या अर्थ नहीं होता, इतिहास विज्ञान नहीं बल्कि अपितु एक कला है।"
विशेष तथ्य (Special Facts):
✦ हीगल: इन्हें 'इतिहास दर्शन' (Philosophy of History) के जनक के रूप में जाना जाता है। हीगल ने भारत को 'मनोकामना पूर्ण करने वाली भूमि' कहा था।
✦ रांके: जर्मनी के इतिहासकार रांके को 'आधुनिक इतिहास', 'आलोचनात्मक इतिहास' और 'अकादमिक इतिहास' का जनक माना जाता है। लॉर्ड एक्टन ने रांके को 'आधुनिक युग का कोलंबस' कहा था।
✦ मार्को पोलो: इस विदेशी यात्री ने कहा था कि "भारत के ब्राह्मण बिल्कुल सत्यवादी हैं, वे किसी भी लालच में झूठ नहीं बोलते हैं।"
✦ शेक्सपियर: इन्होंने भारत को "विश्व के महान अवसरों की चरम सीमा" कहा है।
3. सभ्यता (Civilization) बनाम संस्कृति (Culture)
इतिहास को गहराई से समझने के लिए इन दोनों का मूल अंतर समझना आवश्यक है:- ✦सभ्यता (Civilization): यह मानव जीवन का बाह्य और भौतिक (Physical) पक्ष है (जैसे मकान, औजार, जीवनशैली)। यह मूर्त है जिसे आंखों से देखा जा सकता है। सभ्यता नश्वर (नाशवान) होती है, वह जन्म लेती है, विकसित होती है और अंततः नष्ट हो जाती है (जैसे- हड़प्पा सभ्यता नष्ट हो गई)। यह शरीर के समान है।
- ✦संस्कृति (Culture): यह मानव जीवन का आंतरिक और आध्यात्मिक पक्ष है। यह अमूर्त होती है। संस्कृति कभी मरती नहीं, यह अमर और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। (उदाहरण: हड़प्पा काल की पूजा-पद्धतियाँ और आध्यात्मिकता जो आज भी जीवित हैं)। यह आत्मा के समान है।
4. सृष्टि की उत्पत्ति और भारत का नामकरण
सृष्टि का आरंभ (ऋग्वेद के अनुसार)
- ✦ऋग्वेद में आज से 2500 साल पहले ही यह बता दिया गया था कि ब्रह्मांड के निर्माण में सर्वप्रथम जीव (आदि जीवाणु और हिरण्य गर्भ) की उत्पत्ति जल में हुई थी। जिसे आज का विज्ञान भी सिद्ध कर चुका है।
- ✦भारतीय दर्शन में 'विश्वकर्मा' को सृष्टि का कर्ताधर्ता, निर्माता और ब्रह्मांड का शिल्पकार माना जाता है, जिनकी उत्पत्ति उसी आदि जीवाणु से हुई।
भारत का नामकरण कैसे हुआ?
- ✦भारत:
✦ महाभारत के अनुसार: राजा दुष्यंत और शकुंतला के चक्रवर्ती पुत्र 'भरत' के नाम पर।
✦ जैन मान्यता: प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के पुत्र 'भरत' के नाम पर। (जैन मान्यता यह भी है कि ऋषभदेव की पुत्री 'ब्राह्मी' के नाम पर ब्राह्मी लिपि का आविष्कार हुआ)।
✦ ऋग्वेद के अनुसार: 'भरत जन' (एक कबीले) के नाम पर।
✦ विष्णु पुराण: हिमालय के दक्षिण और समुद्र के उत्तर की भूमि को 'भारत' कहा गया है। - ✦इंडिया (India): यह मूल रूप से यूनानी भाषा के शब्द 'इंडस' से बना है। हेरोडोटस ने केवल सिंधु नदी के आसपास के क्षेत्र को इंडिया कहा, जबकि चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आए मेगस्थनीज (पुस्तक: इंडिका) ने संपूर्ण भारत को इंडिया नाम दिया।
- ✦हिंदुस्तान: यह नाम मूल रूप से ईरानियों (ससानी वंश के अभिलेखों) द्वारा दिया गया। उन्होंने 'सिंधु' नदी का फारसी रूपांतरण 'हिंदू' किया और इसी आधार पर इसे हिंदुस्तान कहा।
- ✦इंतु: चीनी यात्री ह्वेनसांग (वेनसांग) ने सर्वप्रथम इस शब्द का प्रयोग किया था।
- ✦जंबू द्वीप: अशोक के अभिलेखों और बौद्ध धर्म के ग्रंथों में भारत को जंबू द्वीप कहा गया है।
राजशेखर के अनुसार भारत का भौगोलिक विभाजन
राजशेखर ने 'नर्मदा नदी' को आधार मानकर उत्तर के भाग को आर्यावर्त और दक्षिण के भाग को दक्षिणापथ कहा। उन्होंने दिशाओं के आधार पर राजाओं की उपाधियाँ बताईं:- ✦उत्तर के राजा को — विराट
- ✦दक्षिण के राजा को — भोज
- ✦पूर्व के राजा को — सम्राट
- ✦पश्चिम के राजा को — स्वराट
- ✦मध्य देश के राजा को — राजा
- ✦संपूर्ण चारों दिशाओं के स्वामी को — एकराट
5. इतिहास का वर्गीकरण (Classification of History)
ऐतिहासिक 'साक्ष्यों' (लिखित बनाम पुरातात्विक) की उपलब्धता के आधार पर इतिहास को मुख्य रूप से 3 भागों में बांटा गया है:- ✦1. प्रागैतिहासिक काल (Pre-Historic Period): वह काल जिसमें कोई भी लिखित प्रमाण प्राप्त नहीं हुए हैं। इस काल की जानकारी केवल पुरातात्विक साक्ष्यों (जैसे पत्थर के औजार) पर निर्भर है। (उदाहरण: पाषाण काल)
- ✦2. आद्य ऐतिहासिक काल (Proto-Historic Period): वह काल जिसके लिखित साक्ष्य (लिपि) तो उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें कोई पढ़ने वाला नहीं है (अर्थात अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है)। (उदाहरण: हड़प्पा / सिंधु घाटी सभ्यता)
- ✦3. ऐतिहासिक काल (Historic Period): वह काल जहाँ से लिखित साक्ष्य प्रचुर मात्रा में उपस्थित हैं और उन्हें सफलतापूर्वक पढ़ा भी गया है (जैसे अर्थशास्त्र, अष्टाध्यायी आदि)। (उदाहरण: वैदिक काल से लेकर आगे का भाग)
औपनिवेशिक/सांप्रदायिक विभाजन: ब्रिटिश इतिहासकार जेम्स स्टुअर्ट मिल (जो कभी भारत नहीं आए थे) ने भारतीय इतिहास का सांप्रदायिक आधार पर 'त्रियुगीन विभाजन' किया था— हिंदू काल, मुस्लिम काल और ब्रिटिश काल।
6. राजतरंगिणी: भारत की प्रथम प्रामाणिक ऐतिहासिक पुस्तक
भारत में इतिहास को कालक्रम के अनुसार लिखने का प्रथम सफल प्रयास कल्हण ने किया:- ✦लेखक: कल्हण
- ✦समय: 12वीं शताब्दी (1149 ई. से 1151 ई. के मध्य)
- ✦भाषा एवं शैली: संस्कृत काव्य, जो कि महाभारत शैली में लिखा गया है। इसमें 8 तरंग (अध्याय) और 8000 श्लोक हैं।
- ✦ग्रंथ का अर्थ: 'राजाओं की नदी' (River of Kings)।
- ✦महत्व: यह भारत की पहली प्रामाणिक पुस्तक है क्योंकि यह कार्यकरण और कालक्रम (Chronology) के आधार पर व्यवस्थित रूप से लिखी गई है।
- ✦विषय: इसमें कश्मीर के राजवंशों (गुनाद वंश, कारकोट वंश, उत्पल वंश और लोहार वंश) का क्रमिक इतिहास वर्णित है।
- ✦रानी दिद्दा का वर्णन: लोहार वंश की राजकुमारी और क्षेमगुप्त की पत्नी रानी दिद्दा एक प्रभावशाली शासिका थीं। उन्हें "कश्मीर की कैथरीन" के उपनाम से जाना जाता है।
राजतरंगिणी का विस्तार और अनुवाद
- ✦कल्हण ने अपनी मूल पुस्तक में कश्मीर के शासक जय सिंह तक का वर्णन किया है।
- ✦जय सिंह से लेकर सुल्तान जैनुल आबदीन तक के समय का वर्णन 'जोनराज' ने किया है, जिसे 'द्वितीय राजतरंगिणी' कहा जाता है। इसके आगे का इतिहास श्रीवर, प्रज्ञाभट्ट व सूखा ने लिखा है।
- ✦सल्तनत काल में अनुवाद: कश्मीर के शासक जैनुल आबदीन (जिन्हें कश्मीर का अकबर कहा जाता है) ने इसका फारसी अनुवाद करवाया था।
- ✦मुग़ल काल में अनुवाद: सम्राट अकबर के समय इसका फारसी अनुवाद 'शाह मोहम्मद शाहाबादी' ने किया।
- ✦अंग्रेजी में अनुवाद: आधुनिक काल (वर्ष 1900) में विद्वान आर. एल. स्टीन ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया।
7. महत्वपूर्ण संवत (Historical Eras / Calendars)
प्राचीन भारत में काल और समय की गणना (Chronology) के लिए विभिन्न शासकों द्वारा संवत चलाए गए:- ✦कलि संवत (3102 ईसा पूर्व / BC): इस संवत को महाभारत युद्ध की समाप्ति, राजा परीक्षित के कार्यकाल और कलयुग के प्रारंभ का प्रतीक माना जाता है। (इसका स्रोत अथर्ववेद और पुलकेशिन द्वितीय के एहोल अभिलेख में मिलता है)।
- ✦विक्रम संवत (57 ईसा पूर्व / BC): उज्जैनी के राजा विक्रमादित्य द्वितीय द्वारा शकों पर विजय के उपलक्ष्य में यह संवत प्रारंभ किया गया। इसके अन्य नाम मालव संवत या कृत संवत हैं।
- ✦शक संवत (78 ईस्वी / AD): कुषाण शासक कनिष्क के राज्यारोहण के अवसर पर शुरू किया गया। भारत का 'राष्ट्रीय पंचांग' (National Calendar) इसी शक संवत पर आधारित है, जिसे 22 मार्च 1957 को अपनाया गया। राष्ट्रीय पंचांग का प्रथम महीना 'चैत्र' होता है।
- ✦गुप्त संवत (319 ईस्वी): गुप्त शासक चंद्रगुप्त प्रथम के राज्यारोहण के अवसर पर चलाया गया।
- ✦वल्लभी संवत (319 ईस्वी): गुजरात के वल्लभी शासकों द्वारा।
- ✦हर्ष संवत (606 ईस्वी): कन्नौज के शासक हर्षवर्धन के राज्यारोहण पर शुरू।
- ✦हिजरी संवत (622 ईस्वी): पैगंबर मुहम्मद साहब की मक्का से मदीना यात्रा (पलायन) के बाद से चलाया गया।
- ✦लक्ष्मण सेन संवत (1119 ईस्वी): बंगाल के शासक लक्ष्मण सेन द्वारा।
- ✦इलाही संवत (1583 ईस्वी): मुग़ल सम्राट अकबर द्वारा शुरू किया गया। इसे फसली संवत भी कहा जाता है।
- ✦राज्याभिषेक संवत (1674 ईस्वी): छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा 1674 में अपने राज्याभिषेक के अवसर पर चलाया गया।
वर्तमान विक्रम संवत = वर्तमान ईसवी वर्ष + 57 (उदाहरण: 2026 + 57)
वर्तमान शक संवत = वर्तमान ईसवी वर्ष - 78 (उदाहरण: 2026 - 78)
8. भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (National Symbols)
- ✦राजचिह्न (National Emblem): सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ। इसमें चार शेर (सिंह) पीठ सटाकर बैठे हैं, जो शक्ति और साहस का प्रतीक हैं। बिल्कुल मध्य में धर्म चक्र है। चक्र के चारों ओर चार पशुओं की आकृति है: हाथी, दौड़ता हुआ घोड़ा, सांड (वृषभ), और सिंह।
- ✦राष्ट्रीय आदर्श वाक्य: "सत्यमेव जयते" (सत्य की ही जीत होती है)। यह मुंडकोपनिषद से लिया गया है।
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत (National Anthem & Song)
- ✦राष्ट्रगान (National Anthem): 'जन-गण-मन'। इसके रचयिता रबींद्रनाथ टैगोर हैं। यह सर्वप्रथम 1911 ईस्वी में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। इसे गाने का निर्धारित समय 52 सेकंड है।
- ✦राष्ट्रगीत (National Song): 'वंदे मातरम'। इसके लेखक बंकिम चंद्र चटर्जी हैं। यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंद मठ' से लिया गया है। यह प्रथम बार 1896 ईस्वी में कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था (उस समय अध्यक्ष रहीमतुल्लाह सयानी थे)। इसे गाने का समय 65 सेकंड निर्धारित है।
- ✦स्वीकृति: राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत, दोनों को ही भारतीय संविधान सभा द्वारा एक ही दिन 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक रूप से अपनाया गया था।
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👉 100 MCQs प्रैक्टिस सेट हल करेंअक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: इतिहास का जनक (Father of History) किसे कहा जाता है?
उत्तर: यूनानी इतिहासकार 'हेरोडोटस' को इतिहास का जनक माना जाता है। रोम के दार्शनिक सिसरो ने सर्वप्रथम उन्हें यह उपाधि दी थी। हेरोडोटस की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम 'हिस्टोरिका' है, जिसमें उन्होंने भारत और फारस के व्यापारिक संबंधों का वर्णन किया है।
प्रश्न 2: भारत की प्रथम प्रामाणिक ऐतिहासिक पुस्तक कौन सी है और इसके लेखक कौन हैं?
उत्तर: 12वीं शताब्दी में कल्हण द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य 'राजतरंगिणी' को भारत की पहली प्रामाणिक ऐतिहासिक पुस्तक माना जाता है। इसे प्रामाणिक इसलिए माना जाता है क्योंकि यह पहली पुस्तक है जिसे कालक्रम (Chronology) के आधार पर व्यवस्थित रूप से लिखा गया है। इसमें कश्मीर के राजवंशों का इतिहास है।
प्रश्न 3: विक्रम संवत और शक संवत में क्या अंतर है?
उत्तर: विक्रम संवत 57 ईसा पूर्व (B.C.) में उज्जैनी के राजा विक्रमादित्य द्वारा शकों पर विजय के उपलक्ष्य में शुरू किया गया था। वहीं, शक संवत 78 ईस्वी (A.D.) में कुषाण शासक कनिष्क के राज्यारोहण पर शुरू हुआ। वर्तमान में भारत सरकार का 'राष्ट्रीय पंचांग' (National Calendar) इसी शक संवत पर आधारित है।
प्रश्न 4: प्रागैतिहासिक (Pre-historic) और आद्य ऐतिहासिक (Proto-historic) काल में क्या फर्क है?
उत्तर: 'प्रागैतिहासिक काल' (जैसे पाषाण काल) में कोई लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, इसकी जानकारी केवल पुरातात्विक खुदाई पर निर्भर है। जबकि 'आद्य ऐतिहासिक काल' (जैसे हड़प्पा/सिंधु घाटी सभ्यता) में लिखित साक्ष्य तो मिले हैं, लेकिन उस लिपि को अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।
प्रश्न 5: सभ्यता और संस्कृति में मूल अंतर क्या होता है?
उत्तर: सभ्यता मानव जीवन का बाहरी और भौतिक पक्ष है (जैसे मकान, सड़कें), जो नश्वर (नाशवान) होती है। इसके विपरीत, संस्कृति मानव जीवन का आंतरिक और आध्यात्मिक पक्ष है, जो अमर होती है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी निरंतर चलती रहती है।
प्रश्न 6: "इतिहास विज्ञान है, न कम न ज्यादा" - यह कथन किसका है?
उत्तर: यह प्रसिद्ध कथन प्रोफेसर ब्यूरी का है। उनका मानना था कि इतिहास कोई काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि विज्ञान की ही तरह यह ठोस साक्ष्यों, तथ्यात्मकता और निष्पक्ष जांच पर आधारित होता है।
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