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History Study Adda वेबसाइट क्या है?

History Study Adda पर TGT/PGT, LT/GIC, UGC NET, UPSC, SSC सहित सभी One-Day प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इतिहास के महत्वपूर्ण MCQs और नोट्स पढ़ें। 'इतिहास रटने का नहीं, समझने का विषय है' — इसी मूल विचार के साथ, यह सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक बेहतरीन मंच है。

यहाँ हम संपूर्ण इतिहास से संबंधित उच्च-स्तरीय MCQs, विस्तृत नोट्स और तथ्यपूर्ण आर्टिकल्स नियमित रूप से अपलोड करते हैं। जटिल ऐतिहासिक तथ्यों को सरल भाषा में समझाना ही हमारा लक्ष्य है। अपनी तैयारी को और भी मजबूत व सटीक बनाने के लिए हमारी वेबसाइट से जुड़े रहें।

यह एक निजी एजुकेशनल (शैक्षिक) पोर्टल है जिसे विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो 'इतिहास' (History) विषय के साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी सफलता का परचम लहराना चाहते हैं।

History Study Adda की मुख्य विशेषताएँ

  • विषयवार विस्तृत आर्टिकल्स: प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक और विश्व इतिहास की संपूर्ण सामग्री।
  • उच्च स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs): हर टॉपिक पर आधारित अति महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective Questions) और Mock Tests।
  • परीक्षा-उपयोगी शॉर्ट नोट्स: त्वरित रिवीजन (Quick Revision) के लिए टू-द-पॉइंट (To-the-point) आर्टिकल्स।
  • सरल और स्पष्ट भाषा: कठिन से कठिन विषय को भी आसान शब्दों में समझाने का प्रयास।

History Study Adda वेबसाइट का उपयोग क्यों करना चाहिए?

इतिहास अक्सर छात्रों को एक उबाऊ या केवल तिथियों (Dates) और युद्धों को याद रखने वाला विषय लगता है। इस भ्रांति को दूर करने के लिए आपको इसका उपयोग करना चाहिए क्योंकि:

  • यहाँ रटने के बजाय समझने पर जोर दिया जाता है।
  • यह TGT/PGT/LT और UGC NET के विस्तृत सिलेबस को कवर करता है, जिससे One-Day परीक्षाएँ स्वतः ही आसान हो जाती हैं।
  • परीक्षा के बदलते पैटर्न के अनुसार नवीनतम सामग्री लगातार अपडेट होती है।

History Study Adda वेबसाइट का उपयोग हम कैसे कर सकते हैं?

  • कैटेगरी चुनें: होमपेज पर Ancient, Medieval, Modern या World History के सेक्शन में जाएँ।
  • सर्च करें: किसी विशेष विषय (जैसे- मुग़ल काल, सिंधु घाटी) के लिए सर्च बॉक्स का उपयोग करें।
  • रिवीजन और प्रैक्टिस: थ्योरी पढ़ने के बाद उसी विषय के MCQs और Mock Tests को हल करें।

प्रतियोगी परीक्षाओं में 'इतिहास' विषय का क्या महत्व है?

भारत में सिविल सेवा और शिक्षक भर्ती (Teaching Exams) जैसे क्षेत्रों में इतिहास की भूमिका निर्णायक होती है:

  • सामान्य अध्ययन (GS) का आधार: UPSC और State PCS में इतिहास से सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • स्कोरिंग विषय: यदि कॉन्सेप्ट क्लियर हों, तो इतिहास में पूरे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
  • संस्कृति और जड़ों की समझ: यह विषय हमें हमारे अतीत और समाज के विकास को समझने में मदद करता है।

हम परीक्षाओं में इतिहास में अच्छे अंक कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

  • क्रमबद्ध अध्ययन: घटनाओं को क्रोनोलॉजी (कालक्रम) के अनुसार पढ़ें, तिथियां रटने से बचें।
  • मानक स्रोत: केवल प्रामाणिक पुस्तकों और History Study Adda जैसे सटीक प्लेटफॉर्म्स पर अध्ययन करें।
  • MCQs की प्रैक्टिस: थ्योरी पढ़ने के तुरंत बाद उससे जुड़े अधिक से अधिक बहुविकल्पीय प्रश्न हल करें।
  • शॉर्ट नोट्स: एग्जाम के अंतिम दिनों के लिए खुद के की-वर्ड्स (Keywords) वाले नोट्स बनाएं।

भारत में सरकारी नौकरियाँ लोगों को क्यों पसंद हैं?

हमारे देश में सरकारी नौकरी (Government Job) को लेकर युवाओं में एक अलग ही जुनून देखने को मिलता है। इसे केवल एक रोज़गार नहीं, बल्कि जीवन की स्थिरता माना जाता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • करियर और जॉब सिक्योरिटी: प्राइवेट सेक्टर की अनिश्चितता के उलट, सरकारी सेवा में नौकरी जाने का डर न के बराबर होता है।
  • शानदार वेतन और सुविधाएँ: आकर्षक सैलरी (7th Pay Commission) के साथ-साथ महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया (HRA) और मेडिकल जैसी बेहतरीन सुविधाएँ मिलती हैं।
  • समाज में प्रतिष्ठा: सरकारी अफसर या शिक्षक बनने पर समाज और रिश्तेदारों के बीच सम्मान और रुतबा बढ़ता है।
  • तनावमुक्त पारिवारिक जीवन: फिक्स वर्किंग आवर्स और सरकारी छुट्टियों के कारण आप अपने परिवार को क्वालिटी टाइम दे पाते हैं।

सरकारी नौकरी हम कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

सरकारी नौकरी पाना रातों-रात का चमत्कार नहीं है; इसके लिए सही दिशा, अटूट धैर्य और स्मार्ट स्टडी की जरूरत होती है:

  • अपना फोकस साफ रखें: सबसे पहले तय करें कि आपको टीचिंग फील्ड (TGT, PGT, NET) में जाना है या प्रशासनिक सेवा (UPSC, PCS) में।
  • पाठ्यक्रम (Syllabus) से चिपके रहें: ऑफिशियल सिलेबस का प्रिंटआउट लें और पिछले 5-10 सालों के प्रश्न-पत्रों (Previous Year Papers) का बारीकी से अध्ययन करें।
  • प्रामाणिक अध्ययन सामग्री: 10 अलग-अलग किताबें पढ़ने से बेहतर है कि 1 अच्छी किताब को 10 बार पढ़ें। इतिहास के लिए History Study Adda के सटीक नोट्स फॉलो करें।
  • रोज़ाना प्रैक्टिस: सिर्फ थ्योरी पढ़ने से काम नहीं चलेगा। जो टॉपिक पढ़ें, तुरंत उसके MCQs हल करें और मॉक टेस्ट देकर अपनी गलतियों को सुधारें।

History Study Adda आपकी कैसे मदद कर सकता है?

  • सिलेबस-आधारित सामग्री: TGT, PGT, UPSC, NET/JRF के लेटेस्ट सिलेबस के अनुसार कंटेंट।
  • समय की बचत: आपको कई किताबें छानने की जरूरत नहीं, सभी प्रामाणिक स्रोतों का निचोड़ मिलता है।
  • मार्गदर्शन: किस परीक्षा के लिए क्या और कितना पढ़ना है, इसका सही मार्गदर्शन।

History Study Adda पर हमें भरोसा क्यों करना चाहिए?

  • तथ्यों की प्रामाणिकता: हमारा कंटेंट मानक ऐतिहासिक पुस्तकों और प्रामाणिक स्रोतों से अत्यंत सावधानीपूर्वक तैयार किया जाता है।
  • छात्र-हित सर्वोपरि: हमारा उद्देश्य भ्रामक जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्र की सफलता को सुनिश्चित करना है।
  • लगातार अपडेट्स: हम पुरानी सामग्री पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि नए परीक्षा पैटर्न के अनुसार कंटेंट को अपडेट करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. History Study Adda वेबसाइट क्या है?

उत्तर: यह एक निजी शैक्षिक (Educational) पोर्टल है जो विशेष रूप से 'इतिहास' विषय की तैयारी कर रहे छात्रों (TGT, PGT, UPSC, NET आदि) के लिए बनाया गया है。

Q2. क्या यह एक सरकारी वेबसाइट है?

उत्तर: नहीं, यह एक निजी (Private) प्लेटफॉर्म है जो छात्रों को मुफ्त एवं उच्च गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है。

Q3. यह वेबसाइट किन परीक्षाओं के लिए उपयोगी है?

उत्तर: मुख्य रूप से Teaching Exams (TGT, PGT, LT Grade, UGC NET) और Civil Services (UPSC, State PCS, SSC, Railway) के लिए यह अत्यंत लाभकारी है。

Q4. क्या यहाँ मुझे विश्व इतिहास (World History) के नोट्स मिलेंगे?

उत्तर: हाँ, प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास के साथ-साथ आपको विश्व इतिहास के भी विस्तृत नोट्स और MCQs यहाँ प्राप्त होंगे。

Q5. क्या वेबसाइट पर केवल थ्योरी (Theory) पढ़ाई जाती है?

उत्तर: नहीं, थ्योरी के साथ-साथ आपकी प्रैक्टिस के लिए उच्च स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective MCQs) और मॉक टेस्ट भी उपलब्ध हैं。

Q6. क्या वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी प्रामाणिक है?

उत्तर: बिल्कुल, यहाँ उपलब्ध कराई गई सभी अध्ययन सामग्री मानक और प्रामाणिक ऐतिहासिक पुस्तकों के गहन अध्ययन के बाद ही तैयार की जाती है。

Q7. मैं इस वेबसाइट पर किसी विशेष टॉपिक की मांग कैसे कर सकता हूँ?

उत्तर: आप 'Contact Us' पेज पर जाकर या सीधे historystudyadda@gmail.com पर ईमेल के माध्यम से हमें अपने सुझाव और डिमांड भेज सकते हैं。

Q8. क्या हिस्ट्री स्टडी अड्डा का कोई यूट्यूब चैनल या सोशल मीडिया ग्रुप है?

उत्तर: हाँ, आप वेबसाइट के फुटर (सबसे नीचे) में दिए गए लिंक के माध्यम से हमारे Telegram, WhatsApp और YouTube चैनल आदि से जुड़ सकते हैं。

Q9. भारत में सरकारी नौकरी (Government Job) की इतनी मांग क्यों है?

उत्तर: जॉब सिक्योरिटी, बेहतर वेतन, भत्ते और समाज में उच्च सम्मान के कारण सरकारी नौकरी युवाओं की पहली पसंद होती है。

Q10. मैं शिक्षक या सिविल सेवा परीक्षा में सफलता कैसे प्राप्त कर सकता हूँ?

उत्तर: सिलेबस के अनुसार रणनीति बनाकर पढ़ने, प्रामाणिक स्रोतों (जैसे History Study Adda) का उपयोग करने और नियमित MCQs की प्रैक्टिस करने से सफलता निश्चित है。

अस्वीकरण (Disclaimer)

'History Study Adda' पर प्रकाशित सभी अध्ययन सामग्री, नोट्स, बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) और अन्य सूचनाएं केवल छात्रों की परीक्षा की तैयारी और उनके त्वरित मार्गदर्शन के लिए प्रदान की गई हैं। इन्हें कानूनी दस्तावेज़ या अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। हालाँकि हमारी टीम ने सभी तथ्यों और उत्तरों को मानक पुस्तकों के आधार पर पूरी तरह से सटीक और प्रामाणिक रखने का हर संभव प्रयास किया है, लेकिन हम अनजाने में हुई किसी भी मानवीय त्रुटि, टाइपिंग की गलती या चूक के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

प्रश्नों के उत्तर और आयोग (Commissions) के संबंध में विशेष सूचना —
इतिहास जैसे विस्तृत विषय और प्रतियोगी परीक्षाओं के संदर्भ में अक्सर यह देखा जाता है कि अलग-अलग भर्ती आयोग (Commissions) कभी-कभी एक ही प्रश्न के अलग-अलग उत्तरों को सही मान लेते हैं, या विवाद की स्थिति में एक से अधिक विकल्पों को सही ठहरा देते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि किसी प्रश्न का उत्तर एक आयोग के अनुसार कुछ और होता है, जबकि दूसरे आयोग के अनुसार कुछ और। आधिकारिक 'उत्तर कुंजी' (Official Answer Key) और हमारे द्वारा दिए गए उत्तरों में भिन्नता होने की स्थिति में 'History Study Adda' किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं होगा।

छात्रों को स्पष्ट रूप से सलाह दी जाती है कि किसी भी उत्तर या तथ्य की अंतिम पुष्टि के लिए वे संबंधित विभाग/आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, उनकी उत्तर कुंजी और मान्यता प्राप्त मानक पुस्तकों (Standard Books) का ही संदर्भ लें। यह वेबसाइट किसी भी सरकारी संगठन या आयोग से संबद्ध नहीं है; यह पूरी तरह से एक स्वतंत्र और निजी शैक्षिक मंच है।

प्राचीन भारतीय इतिहास के नोट्स : इतिहास का परिचय, वर्गीकरण और प्रमुख संवत

प्राचीन भारतीय इतिहास का परिचय, वर्गीकरण और प्रमुख संवत
प्राचीन भारतीय इतिहास: एक सम्पूर्ण व विस्तृत परिचय
Study Material Overview: History Study Adda के इस विस्तृत पोस्ट में प्राचीन भारतीय इतिहास के मूलभूत सिद्धांतों का सम्पूर्ण अध्ययन शामिल है। इसमें इतिहास की उत्पत्ति, प्रमुख विचारकों के कथन, सभ्यता व संस्कृति में अंतर, सृष्टि की उत्पत्ति व भारत का नामकरण, इतिहास का वर्गीकरण, राजतरंगिणी और महत्वपूर्ण संवतों (विक्रम, शक, गुप्त आदि) को बहुत ही बारीकी से समझाया गया है। यह नोट्स TGT, PGT, UGC NET व UPSC के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

1. इतिहास का अर्थ और उत्पत्ति

'इतिहास' शब्द की व्युत्पत्ति (भारतीय दृष्टिकोण): 'इतिहास' शब्द संस्कृत भाषा (हिंदी की जननी) के तीन शब्दों से मिलकर बना है: इति + ह + आस। इसका शाब्दिक अर्थ है: "ऐसा निश्चित रूप से हुआ है"। इसका तात्पर्य है कि हम इतिहास में कोई भी कपोल-कल्पनाएं (Fiction) नहीं पढ़ते। जो कुछ भी साक्ष्य आपके सामने प्रस्तुत किए जा रहे हैं, वे भूतकाल में कभी न कभी घटित हो चुके हैं।

'History' शब्द की उत्पत्ति (पश्चिमी दृष्टिकोण)
  • 'History' मूल रूप से अंग्रेजी भाषा का शब्द है।
  • इस शब्द की उत्पत्ति यूनानी (ग्रीक) भाषा के शब्द 'हिस्टोरिया' (Historia) से हुई है।
  • 'हिस्टोरिया' का अर्थ होता है— अन्वेषण करना, अनुसंधान करना, या खोजबीन करना (Inquiry/Investigation)

2. इतिहास का महत्व और प्रमुख विचारकों के कथन

भारतीय ग्रंथों में इतिहास का महत्व:

  • अथर्ववेद में: इतिहास को 'उपवेद' और 'पंचम वेद' (पांचवां वेद) कहा गया है। यह परंपरा और निश्चितता का प्रतीक है।
  • महाभारत में: इसके अनुसार, इतिहास केवल घटनाओं का ब्यौरा नहीं है, बल्कि यह ऐसी रुचिकर कथा है जो मनुष्य को जीवन के चार पुरुषार्थों— धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष— की प्राप्ति में मार्गदर्शक का कार्य करती है।
विद्वानों और इतिहासकारों की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ:
  • हेरोडोटस (इतिहास के जनक): इनकी प्रसिद्ध पुस्तक का नाम 'हिस्टोरिका' है। रोम के दार्शनिक सिसरो ने सर्वप्रथम उन्हें 'इतिहास का पिता' कहा था।
  • प्रोफेसर ब्यूरी: "इतिहास विज्ञान है, ना कम ना ज्यादा।"
  • ई. एच. कार: "इतिहास अतीत और वर्तमान के मध्य चलने वाला अनवरत संवाद है।"
  • अबुल फजल: इन्होंने इतिहास को एक 'चिकित्सालय' (Hospital) और एक 'मरहम' के रूप में देखा है।
  • फ्रांसिस बेकन: "इतिहास व्यक्ति को बुद्धिमान बनाता है।"
  • डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: "इतिहास राष्ट्र की स्मरण शक्ति (Memory) है।"

विशेष तथ्य (Special Facts): हीगल को 'इतिहास दर्शन' का जनक माना जाता है। उन्होंने भारत को 'मनोकामना पूर्ण करने वाली भूमि' कहा था। रांके को 'आधुनिक व आलोचनात्मक इतिहास' का जनक माना जाता है।

3. सभ्यता (Civilization) बनाम संस्कृति (Culture)

सभ्यता और संस्कृति में मूल अंतर

सभ्यता (Civilization)

  • यह मानव जीवन का बाह्य और भौतिक (Physical) पक्ष है (जैसे मकान, औजार)।
  • यह मूर्त है जिसे आंखों से देखा जा सकता है।
  • सभ्यता नश्वर (नाशवान) होती है। यह शरीर के समान है।

संस्कृति (Culture)

  • यह मानव जीवन का आंतरिक और आध्यात्मिक पक्ष है।
  • यह अमूर्त होती है।
  • संस्कृति कभी मरती नहीं, यह अमर और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह आत्मा के समान है।

4. सृष्टि की उत्पत्ति और भारत का नामकरण

सृष्टि का आरंभ: ऋग्वेद में आज से 2500 साल पहले ही यह बता दिया गया था कि ब्रह्मांड के निर्माण में सर्वप्रथम जीव (आदि जीवाणु और हिरण्य गर्भ) की उत्पत्ति जल में हुई थी। भारतीय दर्शन में 'विश्वकर्मा' को सृष्टि का कर्ताधर्ता माना जाता है।

भारत का नामकरण कैसे हुआ?

  • भारत: महाभारत के अनुसार राजा दुष्यंत के पुत्र 'भरत' के नाम पर। जैन मान्यता के अनुसार प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के पुत्र 'भरत' के नाम पर।
  • इंडिया (India): यह मूल रूप से यूनानी भाषा के शब्द 'इंडस' से बना है। मेगस्थनीज ने संपूर्ण भारत को इंडिया नाम दिया।
  • हिंदुस्तान: यह नाम मूल रूप से ईरानियों (ससानी वंश) द्वारा दिया गया।
  • इंतु: चीनी यात्री ह्वेनसांग ने सर्वप्रथम इस शब्द का प्रयोग किया था।
  • जंबू द्वीप: अशोक के अभिलेखों और बौद्ध ग्रंथों में भारत को जंबू द्वीप कहा गया है।
राजशेखर के अनुसार भौगोलिक विभाजन:
राजशेखर ने 'नर्मदा नदी' को आधार मानकर उत्तर के भाग को आर्यावर्त और दक्षिण के भाग को दक्षिणापथ कहा। राजाओं की उपाधियाँ: उत्तर– विराट, दक्षिण– भोज, पूर्व– सम्राट, पश्चिम– स्वराट, मध्य देश– राजा, सम्पूर्ण दिशा– एकराट

5. इतिहास का वर्गीकरण (Classification of History)

ऐतिहासिक 'साक्ष्यों' (लिखित बनाम पुरातात्विक) की उपलब्धता के आधार पर इतिहास को मुख्य रूप से 3 भागों में बांटा गया है:

  • 1. प्रागैतिहासिक काल (Pre-Historic): वह काल जिसमें कोई भी लिखित प्रमाण प्राप्त नहीं हुए हैं। इस काल की जानकारी केवल पुरातात्विक साक्ष्यों (जैसे पत्थर के औजार) पर निर्भर है। (उदाहरण: पाषाण काल)
  • 2. आद्य ऐतिहासिक काल (Proto-Historic): वह काल जिसके लिखित साक्ष्य (लिपि) तो उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें कोई पढ़ने वाला नहीं है। (उदाहरण: हड़प्पा / सिंधु सभ्यता)
  • 3. ऐतिहासिक काल (Historic): वह काल जहाँ से लिखित साक्ष्य प्रचुर मात्रा में उपस्थित हैं और उन्हें सफलतापूर्वक पढ़ा भी गया है। (उदाहरण: वैदिक काल से आगे)

औपनिवेशिक/सांप्रदायिक विभाजन: ब्रिटिश इतिहासकार जेम्स स्टुअर्ट मिल ने भारतीय इतिहास का सांप्रदायिक आधार पर 'त्रियुगीन विभाजन' किया था— हिंदू काल, मुस्लिम काल और ब्रिटिश काल

6. राजतरंगिणी: भारत की प्रथम प्रामाणिक ऐतिहासिक पुस्तक

भारत में इतिहास लेखन का प्रथम सफल प्रयास:

  • लेखक व समय: कल्हण द्वारा 12वीं शताब्दी में।
  • भाषा व शैली: संस्कृत काव्य, जो महाभारत शैली में है (8 तरंग और 8000 श्लोक)।
  • महत्व: यह भारत की पहली प्रामाणिक पुस्तक है क्योंकि यह कालक्रम (Chronology) के आधार पर लिखी गई है।
  • विषय: इसमें कश्मीर के राजवंशों का क्रमिक इतिहास वर्णित है।
  • रानी दिद्दा: लोहार वंश की राजकुमारी रानी दिद्दा को "कश्मीर की कैथरीन" कहा जाता है।
राजतरंगिणी का अनुवाद:
सल्तनत काल में कश्मीर के शासक जैनुल आबदीन (कश्मीर का अकबर) ने और मुग़ल काल में सम्राट अकबर के समय इसका फारसी अनुवाद किया गया। आधुनिक काल में आर. एल. स्टीन ने इसे अंग्रेजी में अनुवादित किया।

7. महत्वपूर्ण संवत (Historical Eras / Calendars)

प्राचीन भारत में काल और समय की गणना के लिए विभिन्न शासकों द्वारा संवत चलाए गए:

  • कलि संवत (3102 ईसा पूर्व): महाभारत युद्ध की समाप्ति और कलयुग के प्रारंभ का प्रतीक।
  • विक्रम संवत (57 ईसा पूर्व): उज्जैनी के राजा विक्रमादित्य द्वितीय द्वारा शकों पर विजय के उपलक्ष्य में (इसे मालव या कृत संवत भी कहते हैं)।
  • शक संवत (78 ईस्वी): कुषाण शासक कनिष्क के राज्यारोहण के अवसर पर। भारत का 'राष्ट्रीय पंचांग' (National Calendar) इसी शक संवत पर आधारित है।
  • गुप्त संवत (319 ईस्वी): गुप्त शासक चंद्रगुप्त प्रथम के राज्यारोहण के अवसर पर।
  • हर्ष संवत (606 ईस्वी): कन्नौज के शासक हर्षवर्धन के राज्यारोहण पर शुरू।
  • हिजरी संवत (622 ईस्वी): पैगंबर मुहम्मद साहब की मक्का से मदीना यात्रा के बाद से चलाया गया।
  • इलाही संवत (1583 ईस्वी): मुग़ल सम्राट अकबर द्वारा शुरू किया गया। इसे फसली संवत भी कहा जाता है।
💡 संवत रूपांतरण का सूत्र (Formula):
वर्तमान विक्रम संवत = वर्तमान ईसवी वर्ष + 57
वर्तमान शक संवत = वर्तमान ईसवी वर्ष - 78

8. भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (National Symbols)

राजचिह्न (National Emblem): सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ। इसमें चार शेर (सिंह) पीठ सटाकर बैठे हैं, जो शक्ति और साहस का प्रतीक हैं। बिल्कुल मध्य में धर्म चक्र है। चक्र के चारों ओर चार पशुओं की आकृति है: हाथी, दौड़ता हुआ घोड़ा, सांड (वृषभ), और सिंह
राष्ट्रीय आदर्श वाक्य: "सत्यमेव जयते"। यह मुंडकोपनिषद से लिया गया है।

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत (National Anthem & Song)

  • राष्ट्रगान (National Anthem): 'जन-गण-मन'। इसके रचयिता रबींद्रनाथ टैगोर हैं। यह सर्वप्रथम 1911 ईस्वी में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। निर्धारित समय 52 सेकंड है।
  • राष्ट्रगीत (National Song): 'वंदे मातरम'। इसके लेखक बंकिम चंद्र चटर्जी हैं (आनंद मठ से)। यह प्रथम बार 1896 ईस्वी में कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। निर्धारित समय 65 सेकंड है।
  • स्वीकृति: राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत, दोनों को ही भारतीय संविधान सभा द्वारा एक ही दिन 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक रूप से अपनाया गया था।

9. 🎥 प्राचीन भारतीय इतिहास (Video Class)

ऊपर दिए गए सम्पूर्ण नोट्स को और अधिक गहराई से समझने के लिए आप History Study Adda की यह विस्तृत वीडियो क्लास देख सकते हैं:

प्राचीन भारतीय इतिहास का परिचय, वर्गीकरण और प्रमुख संवत
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Disclaimer: 'History Study Adda' पर उपलब्ध सभी अध्ययन सामग्री और नोट्स केवल छात्रों के त्वरित मार्गदर्शन और परीक्षा की तैयारी के लिए हैं; इन्हें कानूनी दस्तावेज़ न मानें। इतिहास के प्रश्नों में अक्सर अलग-अलग भर्ती आयोगों (Commissions) द्वारा अलग-अलग उत्तरों को सही मान लिया जाता है। अतः, किसी भी मानवीय/टाइपिंग त्रुटि या आधिकारिक उत्तर कुंजी (Answer Key) से भिन्नता के लिए हम उत्तरदायी नहीं होंगे। अंतिम पुष्टि के लिए हमेशा संबंधित आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और मानक पुस्तकों का ही संदर्भ लें। यह पूरी तरह से एक स्वतंत्र निजी शैक्षिक मंच है।