| इकाई I: प्राचीन भारत एवं स्रोत |
- स्रोतों संबंधी वार्ता: पुरातत्वीय स्रोत, अन्वेषण, उत्खनन, पुरालेख विद्या तथा मुद्राशास्त्र। साहित्यिक स्रोत (स्वदेशी व विदेशी), मिथिक, दंत कथाओं आदि का काल निर्धारण।
- पाषाण एवं ताम्र युग: पशुचारण और खाद्य उत्पादन, नवपाषाण और ताम्र पाषाण युग, औज़ार और विनिमय का ढाँचा।
- सिंधु/हड़प्पा सभ्यता: उद्भव, विस्तार सीमा, नगर योजना, धर्म, समाज, व्यापार और ह्रास के कारण।
- वैदिक तथा उत्तरकालीन वैदिक युग: आर्यों से संबंधित विवाद, राजनीतिक/सामाजिक संस्थाएं, वर्ण व्यवस्था का उद्भव, धार्मिक विचार। लौह प्रौद्योगिकी का प्रारम्भ, दक्षिण भारत के महापाषाण।
- राज्य शासन व्यवस्था का विस्तार: महाजनपद, राजतन्त्रीय और गणतन्त्रीय राज्य, द्वितीय शहरीकरण, जैन धर्म, बौद्ध धर्म और आजीवक सम्प्रदायों का उद्भव।
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| इकाई II: राज्य से साम्राज्य तक |
- साम्राज्य का उत्थान: मगध का उत्थान, सिकन्दर का आक्रमण, मौर्यों का प्रसार, राज्य व्यवस्था, अशोक का धम्म, मौर्य कालीन कला और वास्तुकला।
- साम्राज्य का अन्त: इंडो-यूनानी, शुंग, सातवाहन, कुषाण और शक-क्षत्रप, संगम साहित्य और दक्षिण भारत का समाज।
- व्यापार और वाणिज्य: रोमन जगत के साथ व्यापार, महायान बौद्धधर्म, खारवेल व जैनधर्म। कला और वास्तुकला (गांधार, मथुरा, अमरावती)।
- गुप्त वाकाटक युग: राज्य शासन व्यवस्था और समाज, कृषि अर्थव्यवस्था, भू-अनुदान, भू राजस्व और गुप्तकालीन सिक्के। मन्दिर स्थापत्य, पौराणिक हिन्दू धर्म का उद्भव, संस्कृत साहित्य, विज्ञान व प्रौद्योगिकी।
- हर्ष और उसका युग: प्रशासन और धर्म। आंध्र देश में सालांकेयान वंश और विष्णुकुंडीन वंश।
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| इकाई III: क्षेत्रीय राज्यों का उद्भव |
- क्षेत्रीय राज्यों का उद्भव: दक्षिण में राज्य (गंग, कदंब, चालुक्य, राष्ट्रकूट, काकतीय, होयसल), पल्लव, चेर, चोल, पाण्ड्य।
- पूर्वी व पश्चिम भारत: पाल, सेन, वर्मन, भौमाकार, गुजरात के चालुक्य।
- उत्तरी भारत के साम्राज्य: गुर्जर प्रतिहार, कलचुरी-चेदि, गहड़वाल और परमार वंश।
- प्रारम्भिक मध्यकालीन भारत की विशेषताएं: प्रशासन, कृषि अर्थव्यवस्था, व्यापार और शहरीकरण, दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापार।
- धर्म, समाज एवं राज्य निर्माण: ब्राह्मणीय धर्मों का विकास, मन्दिर स्थापत्य, भक्ति आन्दोलन (शंकर, रामानुजाचार्य), समाज (वर्ण, जाति, स्त्रियों की स्थिति), शिक्षा के केन्द्र (मठ, महाविहार), सामन्त मॉडल। अरबों का आक्रमण।
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| इकाई IV: मध्यकालीन भारत एवं साम्राज्य |
- मध्यकालीन इतिहास के स्रोत: पुरातत्वीय, साहित्यिक स्रोत (फारसी, संस्कृत, क्षेत्रीय), विदेशी यात्रियों के वृतांत।
- राजनीतिक घटनाएं (दिल्ली सल्तनत): ग़ोरी, तुर्क, खलजी, तुग़लक, सैय्यद और लोदी वंश तथा उनका ह्रास।
- मुग़ल साम्राज्य की नींव: बाबर, हुमायूँ और सूर वंश; अकबर से औरंगजेब तक प्रसार व सुदृढीकरण। मुग़ल साम्राज्य का पतन एवं विघटन।
- दक्षिण सल्तनत: विजयनगर और बहमनी; बीजापुर, गोलकुंडा, बिदर आदि। पूर्वी गंग और गजपति।
- मराठों का उत्थान: शिवाजी द्वारा स्वराज की स्थापना, पेशवाओं के अधीन विस्तार, मुग़ल-मराठों के सम्बन्ध, मराठा संघ और पतन के कारण।
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| इकाई V: प्रशासन और अर्थव्यवस्था |
- प्रशासन (सल्तनत व मुग़ल): केन्द्रीय, प्रान्तीय और स्थानीय प्रशासन, उत्तराधिकार का नियम। शेरशाह के सुधार, मुग़ल प्रशासन (मंसबदारी, जागीरदारी)।
- दक्षिण में प्रशासन: विजयनगर राज्य व्यवस्था, बहमनी प्रशासन; मराठा अष्टप्रधान।
- कृषि अर्थव्यवस्था: कृषि उत्पादन और सिंचाई, ग्राम अर्थव्यवस्था, किसान वर्ग, अनुदान।
- शहरीकरण और उद्योग: जनांकिकीय ढांचा, सूती कपड़ा, हस्तशिल्प, कारखानें और प्रौद्योगिकी।
- व्यापार और वाणिज्य: राज्य नीतियां, आंतरिक और बाह्य व्यापार, यूरोपीय व्यापार, हुंडी, बीमा, राज्य की आय-व्यय, मुद्रा और टकसाल।
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| इकाई VI: मध्यकालीन समाज और संस्कृति |
- सामाजिक संगठन: सूफी संत (उनके सिलसिले और प्रथाएं), भक्ति आन्दोलन (शैववाद, वैष्णववाद)।
- मध्यकालीन युग के संत: उत्तर और दक्षिण के संत, स्त्री संत, सिख्ख आन्दोलन (गुरुनानक देव, आदिग्रंथ, खालसा)।
- सामाजिक वर्गीकरण: शासक वर्ग, उलेमा, राजपूत समाज, ग्रामीण समाज व किसान।
- स्त्रियों की स्थिति व शिक्षा: जनाना व्यवस्था, देवदासी व्यवस्था। शिक्षा के केन्द्र (मदरसा शिक्षा)।
- ललित कलाएं और वास्तुकला: चित्रकारी (मुगल, राजस्थानी, पहाड़ी), संगीत, इंडो-इस्लामी वास्तुकला, मुगल उद्यान, मराठा दुर्ग, मन्दिर।
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| इकाई VII: आधुनिक भारत का उद्भव |
- आधुनिक इतिहास के स्रोत: अभिलेखागारीय सामग्री, समाचार पत्र, मौखिक साक्ष्य, सृजनात्मक साहित्य।
- ब्रिटिश सत्ता का उत्थान: यूरोपीय व्यापारी (पुर्तगाली, डच, फ्रांसिसी, ब्रिटिश), भारत में ब्रिटिश आधिपत्य का विस्तार।
- ब्रिटिश सम्बन्ध और विद्रोह: बंगाल, अवध, मैसूर, पंजाब आदि से सम्बन्ध। 1857 का विद्रोह (कारण, प्रकृति और प्रभाव)।
- कम्पनी और ताज (क्राउन) का प्रशासन: ईस्ट इंडिया कम्पनी का केन्द्रीय व प्रान्तीय ढांचा, सिविल सर्विस, न्यायतंत्र, पुलिस और सेना।
- संवैधानिक परिवर्तन: रियासतों में ब्रिटिश नीति, स्थानीय स्व-सरकार, संवैधानिक परिवर्तन (1909-1935)।
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| इकाई VIII: उपनिवेशीय अर्थव्यवस्था एवं समाज |
- उपनिवेशीय अर्थव्यवस्था: कृषि का वाणिज्यिकीकरण, भू बंदोबस्त, ग्रामीण ऋणग्रस्तता, सिंचाई व्यवस्था।
- उद्योगों का ह्रास व नई नीतियां: वि-शहरीकरण, आर्थिक अपवहन, ब्रिटिश औद्योगिक नीति, श्रम और मजदूर संघ आन्दोलन। मौद्रिक नीति, रेलवे व संचार।
- नूतन शहरी केन्द्र: नगर आयोजन, अकाल नीति, महामारी। जनजाति और किसान आन्दोलन।
- संक्रमणकाल में भारतीय समाज: ईसाई मिशनरी गतिविधियां, नई शिक्षा नीति (अंग्रेजी भाषा, विज्ञान), भारतीय पुनर्जागरण।
- सामाजिक सुधार: मध्यम वर्ग का उद्भव, स्त्रियों से संबंधित प्रश्न और कानून, प्रिंटिंग प्रेस, लोकमत, भारतीय भाषाओं का आधुनिकीकरण।
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| इकाई IX: भारतीय राष्ट्रवाद का उत्थान व स्वतन्त्रता |
- भारतीय राष्ट्रवाद: राष्ट्रवाद का सामाजिक एवं आर्थिक आधार, भारतीय नेशनल कांग्रेस का जन्म (1885-1920), स्वदेशी और स्वराज।
- आन्दोलन: गांधीवादी जन आन्दोलन, सुभाष चंद्र बोस और आई.एन.ए., वामपंथी राजनीति, दलित वर्ग आन्दोलन।
- स्वतन्त्रता और विभाजन: साम्प्रदायिक राजनीति, मुस्लिम लीग, स्वतन्त्रता और विभाजन की चुनौतियां।
- स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत: रियासतों का एकीकरण (कश्मीर, हैदराबाद, जूनागढ़), बी. आर. अम्बेडकर एवं संविधान का निर्माण।
- नीतियां: नई शिक्षा नीति, आर्थिक नीतियाँ और नियोजन, भाषाई पुनर्गठन, विदेश नीति (पंचशील), आपातकाल, उदारीकरण और वैश्वीकरण।
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| इकाई X: ऐतिहासिक प्रणाली एवं इतिहास लेखन |
- इतिहास दर्शन: इतिहास की विषय सीमा और महत्त्व, वस्तुनिष्ठता और पूर्वाग्रह, कारण-कार्य-सम्बन्ध और कल्पना।
- शोध कार्यप्रणाली: प्राक्कल्पना, स्रोत संग्रह, विषय का चयन, पाद टिप्पणियां, साहित्यिक चोरी, बौद्धिक बेईमानी।
- इतिहास लेखन: यूनानी, रोमन एवं गिरजाघर सम्बन्धी इतिहास लेखन, पुनर्जागरण का प्रभाव।
- प्रमुख दर्शन एवं सिद्धान्त: इतिहास का मार्क्सवादी दर्शन, चक्रीय सिद्धान्त, औसवाल्ड स्पेंगलर, अर्नोल्ड जोसफ टॉयनबी (चुनौती एवं प्रत्युत्तर सिद्धान्त)।
- आधुनिक प्रवृत्तियां: इतिहास में उत्तर-आधुनिकतावाद, वर्तमान भारतीय इतिहास लेखन।
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